Shiva Shabdasagar Part I- 501 TO 600

Songs 101–205 (FULL REBUILD)

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[ 39-503 ] जब गुरु की बंधी मन में आसा, अज्ञान भरम घट का नासा ॥टेक॥अखंड मंडलाकारम्, व्याप्तम् एन चराचरम् Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[37-504 ] सुरत चढ़ गई आज अटरिया जी, खोली भ्र मध्य कुठरिया जी ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[38-505 ] पट अपट प्रेम की घटा छाई, भक्ति गुरु रिमझिम झरी लाई ॥टेक॥तीन ताप का दुख मिटा, प्रीति लता रही छाय Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 506 ] गुरु के चरन सरोज में, कोटि कोटि दंडोत Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 507 ] दीन हित करुना निधान, कपाल सुख सागर महा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 1-508 ] अपनी शरण में लेलो, मेरे कृपाल दाता Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 2-509 ] तुम बिन नहीं है कोई, मेरे दयाल दाता Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[3-510 ] देखा है रूप बाहर, अंतर में अब दिखादो Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[4-511 ] तुम कौन और क्या हो, अपना पता बतादो Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 5-512 ] लेता हूँ नाम तेरा, दाता दयाल है तू Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[9-513 ] तेरी दया हो मुझपर, मेरे कपाल दाता Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[7-514 ] आया तेरी शरण में, कर मेरी लाज प्यारे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[8-515 ] सतगुरु फकत जगत में, दुख से छुड़ाने वाले Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[9-516 ] ऐ शीलवन्त स्वामी, करदो मुझे सुशीला Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[10-517 ] उसकी हो जुस्तजू क्या, जो अपने रूबरू है Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 518 ] सर्व समरथ साइयाँ, भव द्वन्द मेटनहार Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 519 ] धन धन सुखदाता जग पितु माता, आदि अनन्त अमाना Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[1-520 ] गुरु दाता चरण की धूर मिले ॥टेक॥करूँ धरूँ आँखों का अन्जन, दिव्य दृष्टि भरपूर मिले ॥गुरु0 सूझे अण्ड खण्ड ब्रह्माण्डा, निकट पदारथ दूर मिले ॥खुले नयन सरूप निहारू, माया भरम सब दूर मिले ॥सहज सहज में सहज सहज में, प्रेम भक्ति की मूर मिले ॥राधास्वामी चरन की आस रहे नित, सतपद का सतनूर मिले Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[2-521 ] गुरु दाता करो मेरी आप संभार ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[3-522 ] गुरु प्यारे दरस दो मोहि अपना ॥टेक॥दरशन बिन मोहि चैन न आवे, रात दिवस का है तपना Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[4-523 ] गुरु दाता मौज करो आज नई ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 5-524 ] गरु स्वामी दया की दृष्टि करो Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[9-525 ] गरु दाता की छवि पर बलिहारी Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[7-526 ] गुरु प्यारे दया करो दृष्टि संभार ॥टेक॥मैं भूली भरमी मारग में, हिया जिया व्याप रहा संसार ॥गुरु0 दुविधा छल चतुराई के बस, डूब रही भव सिंधु मँझार ॥कोई जग में मीत न मेरा, मतलब के सब कुल परिवार ॥मैं अनजान समझ नहीं मुझमें, अपनी मेहर से करो सुधार ॥राधास्वामी जीव हितेषी, तुम हो रचना के आधार ॥ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[8-527 ] गुरु प्यारे से प्रेम लगा मेरा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 528 ] सिरजन हारा पालन हारा, करतारा जगदाधारा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 529 ] दीन बन्धु कृपाल स्वामी, जगत के आधार Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[1-530 ] सत संगत में अमृत बरसे, सत संगत ॥टेका मूरख जन कोई भरम न जाने, यू ही तृष्णा से तरसे ॥सत संगत ज्ञानी पिये सुधारस नामा, सतगुरु चरन कमल परसे ॥सार तत्व भेद लख पावे, तत्व विवेक का गुर दरसे ॥शठ सुधरहिं सत संगत पाई, सहज ही सहज काज सरसे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[2-531 ] तेरा रूप अनूप अपार, दूजा क्या देखे ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 3-532 ] गुरु दाता सहज में तारगे, गुरु दाता ॥टेका Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[4-533 ] यह दुनिया गोरख धन्दा है, यह दुनिया ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[5-534 ] दो दिन का भोग बिलासा है, दो दिन का ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 9-535 ] करले निज उपकार, मानुष तन पाया ॥टेका Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[7-536 ] कर आपन घट उजियार रे, आपन घट ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[8-537 ] तेरी काया में सत करतार, भटका क्यों खावे ॥टेक॥काया में है माया दाया, काया स्वर्ग दुवार ॥भटका0 काया सोध सोध निज काया, काया का भेद अपार ॥भटका0 काया निरगुन सगुन है काया, काया ब्रह्म अपार ॥भटका0 काया मध्ये सहस कमल दल, काया में ओंकार ॥भटका0 सुन्न महासुन्न काया रहे, काया सोहंग सार Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[9-538 ] जब लागी सहज समाध, फिर क्या करम बने ॥टेक॥तीरथ बरत नियम और धरमा, सब मन के हैं उपाध ॥फिर क्या आँख खुली तब निकट वही देखा, सुरत भई बिस्माध ॥फिर क्या द्वत अद्व त का झगड़ा छूटा सब, रहा न एक न आध ॥फिर क्या राधास्वामी चरन शरन बलिहारी, तत समझे कोई साध ॥फिर क्या Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[10-539 ] नर भूला भूला क्यों भटके, ले चेत सवेरा है भाई ॥टेक॥आना जाना भरम है मनका, इसके झटके क्यों भटके ॥ले चेत बन्धन मुक्ति अज्ञान की बातें, मूरख सब इनमें अटके Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
11-540 Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[13-542 ] नर जनम गया बरबाद, मूरख ना चेते ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[14-543 ] सतगुरु दीन अजब उपदेशवा ॥टेक॥जब से सुनी गुरु की बानी, मिट गया मन का सकल अंदेसवा ॥सत काल करम माया नहीं व्यारे, नासा जग का बिपत कलेसवा ॥सत सत्त धाम से सतगुरु आये, धुरका दया से दीन संदेसवा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 15-544 ] जग जाल फैसा मेरा मन पानी ॥टेक॥समझ न आवे जूझ न पाये, दया त्याग भया सन्तापी ॥जग अन्त समय कुछ काम न आये, यम की जब सीसपड़े थापी जग बिन कारज उत्पात मचावे, दंड सहे आपहि आपी ॥जग भक्ति के पन्थ पग नहीं देवे, काम क्रोध की डगर नापी जगराधास्वामी चरन शरन बलिहारी, अब तो छोड़ा आपा तापी ॥जग Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[19-545 ] भक्ति बिन यमपुर जावेगा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
17-546 Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 18-547 ] मैं तेरी न मानूंगी बात बेदरदी, जा जा जा रे ॥टेका Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[19-548 ] मैं होगई गुरु सत संगी हो, मैं होगई ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 20-549 ] चल घट की ओर सुरत प्यारी, जहाँ नित अमृत जल बरसे ॥टेक॥घट की लीला अगम अलौकिक, घट से काज सभी सरसे ॥जहाँ0 घट में नूर सुरूर शब्द सत्र, घट का बासी नहीं तरसे ॥जहाँ घट में राधास्वामी चरन निवासा, घट में चरन कमल परसे ॥जहाँ0 Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[21-550 ] पनिहारी पानी भरन निकरी, पनिहारी ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[22-551 ] सरने की बात निराली है, सपने की ॥टेक॥साना तोज तेव्हार का उत्सव, सपना होली दिवाली है Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[23-552 ] तेरे घट में बिमल बहार, तू बाहर ना जारे ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 553 ] सहज में भव पार कर दो, नाव है मँझधार में Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 554 ] तुम आये इस जगत में, दीन जीव के काज Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 1-555 ] मन भजले गुरु करतार को नित, मन भजले ॥टेक॥गुरु है आनन्दघन सुखरासी, अजर अमर घट घट के बासी Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[2-556 ] तेरा जनम अकारथ जाय, मन कुछ चिंता कर ॥टेक॥खेल कूद में समय गंवाया, गुरु पद कमल न नेह लगाया Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 3-557 ] तुम उलट चलो हाँ उलट चलो असमान, नीचे क्यों रहना Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[4-558 गुरु चरन कमल की छाँह ले, तब काज बने Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[5-559 ] भक्ति के मारग जो आवे, भक्ति के टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[9-560 ] कोई माने न गुरु की बात, धोखे धार बहा ॥टेक॥सौदा करने हार में आया, गाँठ की पू जी धूर मिलाया Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 7-561 ] मेरा तेरा कहाँ हो मेल, तू भव धार बहा ॥टेका Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[8-562 ] शब्द कमाई कमावे, सोई मेरा साथी ॥टेक॥चढ़ असमान गगन को धावे, विषय वासना चित से मिटावे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[9-563 ] सन्तों का मारग झीना है, सन्तों का ॥टेक॥यह तो नित्य निवृति का रस्ता, मॅहगा नहीं बहुत है सस्ता Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[10-564 ] पी पी रे अभागे आय, गगन से बून्दा झरे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 11-565 ] पी पी सुधारस नाम, तेरा नर जनम बने ॥टेक॥क्यों जन्मे मरे क्यों जग से डरे, क्यों त्रास करे क्यों गिरे परे ॥राता माता नाम का, ले अमृत रस चाख Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 12-566 ] नहीं कोई तेरा यगाना है, नहीं कोई ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[567 ] चरन शरन गुरु दीजिये, शरनागत आया Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 568 ] नाम दान दे अपना कीजे, गुरु निज सेवक जानी Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[1-569 ] गुरु महिमा अगम अपार, गुरु गति कौन कहे ॥टेक॥बिन गुरु धर्म न कर्म कुछ, विन गुरु भक्ति न ज्ञान Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[3-571 ] गुरु कीजे आप सहाय, चरन में आन पड़ा ॥टेका Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[4-572 ] गुरु कीजे मेरी सहाय, शब्द में चित मेरा लागे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[5-573 ] कर सतसंग अस्नान, तीरथ राज यही ॥टेक॥गंग भक्ति जमुना कर्म धारा, सरस्वती ज्ञान मई Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[9-574 ] सब भोगे बारम्बार, अवश फल कर्म किये का Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[7-575 ] मन में बसे गुरु रूप, दरशन क्यों न बने ॥टेक॥निकट दूर सब कल्पना, चित चंचल की रीति Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[8-576 ] प्रेम की महिमा कहे कौन, यह है अकथ कहानी Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[9-577 ] बदला मन का रंग, प्रेम जब चित में बसा ॥टेक॥पहले मन था हिंसक पूरा, जीव घात नित करता Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[10-578 ] प्रगटा प्रेम प्रभाव, लगन प्रीतम संग लागी ॥टेक॥जोती जले प्रेम की घट में, मन मेरा भया पतिंगा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[11-579 ] कौन गिने तिथि वार, प्रेम जब मन में रमा टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[12-580 ] गुरु मुख बिन जाने नहीं कोई, गुरु का भेद अपारा टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 14-582 ] तू भरम रहा संसार, तेरी बुद्धि गई ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[15-583 ] मेरी सुध बुध करना आप, बिकल मन तड़प रहा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[19-584 ] कर प्रेमी जन का संग, तेरा नर जनम बने ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[17-585 ] गुरु कीजे मेरी सहाय, विपति से तड़प रही ॥टेक॥रोग सोग से रही घबरानी, चित में छाई है हैरानी Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[18-586 ] दुख सहा जगत में आय, न सत पद जान के भूलू गी ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
19-587 1 तूने सतगुरु किया न संग, काल से कौन बचावेगा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 20-588] तेरा भेद न जाने हाय, जगत धोखे में रहा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[21-589 ] क्या है पद निर्वाण, नहीं कुछ समझ में आवे ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 22-590 ] तेरे मन में झाड़ झंकार, तू बन में ना जा रे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 23-591 ] गुरु रूप न समझे कोय, भरम में पड़े अज्ञानी ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 24-592 ] गुरु दरस दिखादो जल्दी, विकल मन सोच रहा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 25-593 ] क्यों तू टू हे देश विदेश, तेरा प्रीतम तेरे घट में ॥कासी वासी मथुरा भटके, मथुरा वासी कासी Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[29-594 ] नहीं मन में सोच विचार, भटके संसारी मग में ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[27-595 ] पी पी ले अमी रस धार, गगन से झरी लगी ॥टेक॥बुन्द का चूका घड़ा भर पावे, सपने में वह स्वाद न आवे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[28-596 ] झूला झूले सुहागिन नार, पिया का धर हृदय में ध्यान ॥टेक Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 597 ] गुरु ने अस कृपा करी, दिया ठौर ठिकाना Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[ 598 ] धन रूप भूप अनूप निगुन, सगुन गुनकारी प्रभु Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[1-599 ] तू दयाल है दया की मूरत, तेरी दया का दान मिले Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[2-600 ] दाता ज्ञाता पितु और माता, छिन छिन तेरा ध्यान रहे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[3-601 ] जगत में आये बहुत दुख पाया, प्रेम का नगर दिखादो जी Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[602 ] धन धन भव भंजन जन मन रंजन, काम निकंदन गुरु राई Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[5-603 ] धन धन धन दाता सुर मुनि त्राता, व्यापक परमा नन्दा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[9-604 ] प्राणों का है प्राण पिता तू , जीवन का है आधारा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[605 रोम रोम में गुप्त हुआ है, अणु अणु में प्रगट है तू Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
[8-606 ] मन मोहन चित चोर छबीला, अलबेला प्यारा है तू Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…

Updated: November 30, 2025 — 11:52 am

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