400. है पिंड घट तुम्हारा, ब्रह्मांड घट बना है ।दोनों की न्यारी लीला, दोनों में घट पना है ॥1 ॥है ब्रह्म उससे व्यापक, और तुम हो इसमें व्यापक ।दोनों की एकता है, दोनों का सामना है ॥2 ॥जो इसमें उसमें भी वह, समझेगा कोई ज्ञानी ।अज्ञानी समझे कैसे, अज्ञान में सना है ॥3 ॥सतसंग गुरु […]
Category: Shiva Shabdasagar Part 2
Shiva Shabdasagar Part II-201-400
(201)धन धन धन जग त्राता,धन त्रिभुवन स्वामी। धन धन धन पितु माता,धन अन्तर्यामी । प्रभुधन अन्तर्यामी। भक्ति भाव स्वामी पाऊँ,चरन शरन ध्याऊँ। चरनन चित्त लगाऊँ,सेवा में धाऊँ,प्रभु सेवा में धाऊँ। आदि गुरु परमातम,तुम मंगलकारी। जन सेवक सुखदायक,जीवन हितकारी, प्रभु जीवन हितकारी। प्रेम रूप करतारा,घट घट के बासी। मन बुद्धि से पारा,अनुपम अविनासी, प्रभु अनुपम अविनासी।। […]







Hits Today : 514
Total Hits : 1712317