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Song 58 — Hindi
60.क्यों रोता रहता है हरदम, क्या लुप्त है आँसू बहाने में ।
हँस खेल मिलेगी खुशी तुझे, हँसने में और हँसाने में ॥॥
इल्म में अक्ल में होश खिरद के, बनने में जो जौहर है निहां ।
वह शक्ल बदल कर है जाहिर, नादान में और दिवाने में ॥॥
साये में नूर में फर्क कहां, जो असल में है वह नकल में है ।
जो दिल में रूह में है मक्फी, वही जिस्म के है काशाने में ॥॥
सच झूठ की है बुनियाद एक, किसको कहूँ बद और किसको नेक ।।
है बात की बात में बात ओ खुद, शामिल है बात बनाने में ॥॥
आवाज में है और साज में है, वह राज में नाजो नियाज में है।
दमबाज में है दमसाज में है, बाजे में है बाजे बजाने में है ॥॥
वहदत में कसरत का है पता, कसरत में खिलवत की है जा ।
है एक हजार लाख जब खुद, क्या धरा है गिनती गिनाने में ॥॥
वहदत का जाम पी ले जाबित, हरहाल में मस्ती खुशी मिले।
है राधास्वामी की यह सुनले सदा,और खुशी है दिल बहलाने में ॥॥
61.कोई कैसे जाने हकीकत को, हक से नहीं है जब काम उसे ।
हक नाहक की कुछ समझ नहीं, नहीं हक का मिला पैगाम उसे ॥॥
है वहम में फसकर हैरानी, और हैरानी से परेशानी ।।
दिल उसका हुआ बेचैन चैन से, समझलो तुम नाकाम उसे ॥॥
नहीं संगत सतगुरु की पाई, नहीं सच्ची समझ बुझ आई ।।
फिर जात की कैसे मिलती खबर, घेरे हुये हैं औहाम उसे ॥॥
दुनियाँ के दीन के झगड़े हैं, इन झगड़ों ने धर कर रगड़े हैं।
इन झगड़ों रगड़ों में जो फसा, दिन रात कहां आराम उसे ।।।।
कह दो उनसे कुछ सहबत कर, ले दिल में अपने गुरु का असर।।
बेफिकरी से हो जिंदगी बसर, न फंसायेगा दुनियाँ का दाम उसे ॥॥
खिलवत कसरत की समझ आये, नहीं भरम करम नित भरमाये ।
वहदत का रंग कुछ जम जाये, मिल जायेगा मस्ती का जाम उसे ॥॥
दुनियां और द का बन बंदा, बंदा बनके हुआ है गंदा ।
यह गंदगी सब मिट जायेगी, नजर आये जो हक का नाम उसे ।।।।
न वह भूल के दुनियां घर छोड़े, नहीं जर्मी न जन नहीं जर छोड़े।
सतगुरु से नाते को जोड़े, फिर सुख है सुबह व शाम उसे ॥॥
जब तक गुरु हाथ न आयेगा, कोई पता न हक का पायेगा ।
नित भरमेगा भरमायेगा, छोड़गे न दर्द आलाम उसे ॥॥
गर शौक हो तुमको बिसाले सनम,सुलतानुलजकार का शागिल बन ।
फिर दिल से कलामे हक को सुन,है राधास्वामी का पैगाम उसे ॥॥
62. मौजूद वजूद की है सूरत, मौजूद ही आप वजूद हुआ ।
हाजिर में हुज्जत है बेजा, गायब का दम बेसूद हुआ ॥॥
जो गायब में है वह गायब है, गायब के खयाल से बाज आओ ।।
हाजिर को बचश्म हाल देखो, हाजिर ही कमाल नमूद हुआ ।।।।
मोजूद वजूद समूद बऊद, हालात हाल के हैं जाहिर ।।
जो जाहिर है वही बतिन है, जाहिर बातिन का शहूद हुआ ॥॥
किस खुदा का सिदा करते हो, क्यों बंदा बनकर मरते हो ।
क्या नहीं सुना है। तुमने कभी, सबका आदम मस्ज़द हुआ ।।।।
अशरफ अकमल अकबर अजमल, औसाफ हैं यह सब आदम के ।
आदम अफजल है मोकद्दस है, आदम मंजिले मकसूद हुआ ।।।।
आदम में खुदा को तलाश करो, इस राज को कभी न फाश करो।
आदम मजहर है हकीकत का, आदम ही कुल बहबूद हुआ ॥।।
जो हक है हक की हकीकत है, वह हक से जुदा नहीं हरगिज ।
क्या यहाँ है हक के सिवा भाई, यह हक ही नुजूलो सऊद हुआ ।।।।
मैराजे तमन्ना है आदम, काभिल इन्साँ का कमाल सुनो।
मस्जूद मलिक और नूर फलक, वही जैमी में खुद मसऊद हुआ ॥॥
लोलाक का कल्मा पढ़ो खादिर, मसजूद मलायक तुम खुद हो ।
आदम को न सिजदा किया जिसने, मखहूर हुआ मरद हुआ ॥॥
जो अलरफनफसहू को जाना, उसने रब को भी पहचाना ।
है राधास्वामी का फरमाना, यह खुद ही खुद माद हुआ ॥॥