[56 829 ] तेरी गुदड़ी में लाल टका, क्यों नहीं नजर करे ॥टेका॥ बगल में लड़का शहर ढिंढोरा, मूरख भरम मरे ॥ क्यों नहीं हिरन के नाम रहे कस्तूरी, बन बन भटक फिरे ॥ मानुष तन में साहेब बसता, नर पाखान लखे ॥ बिन सतगुरु सब धोका खाया, कैसे कोई समझे ॥ राधास्वामी गुरु जब जीव चेतावें, तब भव सिंध तरे ॥ [60 830 ] निस दिन सत्त नाम धुन माते ॥टेका॥ जब से हृदय पड़ी गुरु मूरत, मन फूले न समाते ॥ जब सेवा भजन बन्दगी करते, कहीं आते नहीं जाते ॥ जब घट में राग रागनी सुनते, अनहद तूर बजाते
[56 829 ] तेरी गुदड़ी में लाल टका, क्यों नहीं नजर करे ॥टेका॥
बगल में लड़का शहर ढिंढोरा, मूरख भरम मरे ॥
क्यों नहीं हिरन के नाम रहे कस्तूरी, बन बन भटक फिरे ॥
मानुष तन में साहेब बसता, नर पाखान लखे ॥
बिन सतगुरु सब धोका खाया, कैसे कोई समझे ॥
राधास्वामी गुरु जब जीव चेतावें, तब भव सिंध तरे ॥
[60 830 ] निस दिन सत्त नाम धुन माते ॥टेका॥
जब से हृदय पड़ी गुरु मूरत, मन फूले न समाते ॥
जब सेवा भजन बन्दगी करते, कहीं आते नहीं जाते ॥
जब घट में राग रागनी सुनते, अनहद तूर बजाते ।॥
जब प्रेम पियाला पिया मस्त हो, छिन छिन गुरु गुन गाते ॥
जब नहीं अभिमान काम मद मोहा, सबको दूर भगाते ॥
जब राधास्वामी चरन शरन बलिहारी, गुरु पर बलि बलि जाते ॥