[113 883 ] सुरत प्यारी सुन अनहद धुन तान ॥टेक॥ शब्द है ब्रह्म शब्द परब्रह्म, ईश्वर शब्द प्रमान ॥ सुरत माया काल शब्द की मूरत, शब्द में शब्द समान
[113 883 ] सुरत प्यारी सुन अनहद धुन तान ॥टेक॥
शब्द है ब्रह्म शब्द परब्रह्म, ईश्वर शब्द प्रमान ॥
सुरत माया काल शब्द की मूरत, शब्द में शब्द समान ।॥
सुरत शब्द ने रची त्रिलोकी सारी, शब्द है सब का प्रान ॥ सुरत
सहस कँवल दल शंख घंट सुन, त्रिकुटी ओउम् निशान ॥
सुरत0 सुन्न महासुन्न रारंग सारंग, भवर सोहंगम जान ।॥
सत पद अलख अगम को परखा, व्यापा शब्द महान ॥
जो कोई शब्द की करे कमाई, फंसे न चारों खान ॥
नाम है शब्द अनाम शब्द है, समझे साधु सुजान ॥
गुप्त प्रगट में शब्द विराजा, सुरत शब्द पहचान ॥
बाच लक्ष सब शब्द रूप में, तत्व में तत्व सुजान ॥
ज्ञान अनुमान प्रमान समाना, यह सब शब्द न आन ॥
साधु सन्त और हंस शब्द है, क्षीर नीर के छान ॥
लगन लगे घट में तब प्रगटे, जीते जी निरवान ॥
शब्द ही मारे शब्द जिलावे, शब्द का कर अनुमान ॥
सतगुरु बानी शब्द की खानी, राधास्वामी किया बखान ॥