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Song 322 — Hindi
क्यों भूला तू प्यारे मग में, भरमा क्यों डाकू और ठग में।।
टेका। सतगुरु आये तोहि चितवन, दया से अंग लगाया।।
भवजल पार उतारन कारन, शब्द जहाज बनाया।।
हाँ मग मेंबड़े बने तो हुये कबीरा, नन्हे बने तो नानक।।
दोनों रूप बिसारा तूने, राधास्वामी आये अचानक।।हाँ मग में,
विद्या अविद्या फाँस हँसातू , द्वन्द जाल में उरझा।।
दुविधा दुचिताई के बन्धन, कैसे कहूँ तू सुरझा।।
मग में, मेरा कोई नहीं है अपना, सब स्वारथ के साथी।।
झूठे सुरव धन धाम बड़ाई, भूठे घोड़े हाथी।।
हाँ मग में कर सतसंग विवेक धार चित, सीखे शब्द मत रीती।।
सहज योग का सहज है साधन, धर मन में प्रतीती।।
हाँ मग में, सहज समांध अखंड सुन्न पद, घट में अघट का बासा।।
राधास्वामी की शरन में आज, कर सतलोक निवासा।।
हाँ मग में अजपा जाप सहज है साधन, साधन अनुभव जागे।।
बिन साधन अनुभव नहीं भाई, बिन अनुभव क्या माँगे।।
हाँ मग में कुछ दिन सतसंग कुछ दिन साधन, कुछ दिन मुक्ति बिलासा।।
बन्धन मुक्ति मानसिक लीला, कामी देख तमासा।।
मग में जाप मरे अजपा मर जाये, अनहद भी मर जाये।।
सुरत समानी शब्द में आकर, ताहि काल नहीं खाये हाँ
मग में नानक और कबीर की बानी, बिबिध अनेक सुनाई।।
चही अलाप अब नये ढंग में, राधास्वामी ने गाई।।हाँ मग़ में