Shiva Shabdasagar Part I- 301 TO 400

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मेला मेल मिले का मेला।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मैं अपने मन से हार गई।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
जगत की झूठी परतती।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
रंग पाय सुरंगी होगई॥टेक॥ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
तू एड़ी चोटी तक व्यापा।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
अब अपना आपा जान गया।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
गुरु स्वामी करो तुम मेरी सहाय।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
तेरी काया नगरी कासी है।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
जब आँख खुले तब नजर पड़े।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
गुरु ने अमृत नाम पिलाया॥टेक॥ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
बाबा अपनी ओर निहार।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
तेरी गति मति कौन लखे।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मुझे नाम मिला है धरनी धर।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मुझे नाम का हीरा प्राप्त हुआ।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
जिसे काल करम भरमाता है, उसे मायाजाल फँसाता है।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मन मगन भया बकवास गया।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
रह धरनी सुमिरो धरनीधर।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मेरे प्यारे भाई ले गुरु की शरनाई।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
सुरत प्यारी चित्त में धर अनुराग॥टेक॥ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
माई तज दे जग की असा।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
नहीं कोई बचा अवगुनी गुनी, ठगनी ने ठग लिये ऋषि मुनी।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
क्यों भूला तू प्यारे मग में, भरमा क्यों डाकू और ठग में।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
माई सुख से जनम बिताओ॥टेक॥ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
तू भूली भरमानी माई।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
प्यारी प्रेम प्यार ले सीख।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
पत्नी पतिव्रत धरम निबाह॥टेक॥ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
पत्नी पति की ओर निहार।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
सजन प्रेम के सिंधु नहा टेका। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
सखी लख मानुष जनम का सार हटेका।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मन मगन भया तब क्या चहिये।।टेका। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
बिनती करुणा निधान कृपाल सतगुरु, प्रणतपाल महेश्वरम्।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मंगलम् मंगलम् अशब्द अरूप, शब्द रूप स्वामी।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
चौथी धुन आस आस जीव बंधे, आस जम की फाँसी।।टेका। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मन के नाच सारे नाचे, ऋषि मुनि नर देवा।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मनु मतवाला बना, रह रह कर नाचे।।टेक। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मनुआ कुछ सोच समझ, दो दिन जग जीना॥टेक॥ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मनुआ तू कहा मान, चेत चेत बौरे।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मनुआ चित हिये धार, सतगुरु की बानी॥टेक॥ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
गगन मंडल धूम मची, देखो सुरत मेला।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
संगत कर गुरु की सखी, घट विवेक आवे।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
चल तू सुरत गगन ओर, त्याग जग की आसा।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
भक्तन के लाज काज, सतगुरु जग आये।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
चेत चेत चेत अभी, चेत मेरे भाई।।टेका। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
नाम सुमिर प्यारे भाई, नाम में भलाई।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
ठुमक चली गगन मंडल, सुरत झीनी झीनी।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
थिक थिक मेरी सुरतिं नाचे, नाच हैं रंगीला।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
राधास्वामी राधास्वामी, राधास्वामी गाइये॥टेक॥ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
नाम सुमिर नाम सुमिर, गुरु पर बलि जाना।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
बिनती गुरु मध्य आदि अनंत अद्भुत, अमल अगम अगोचरम्।।<br />विभ्र विरजपार अपार निगुन, सगुन सत्य विश्वेश्वरम्।।<br />जेहि मति लखे नहिं गति लखे, यह शुद्ध तत्व बिचार है।<br />जो चरन कमल की ओट आया, भव से बेड़ा पार है।।<br />गुरु विष्णु मूरत शिव की सूरत, गुरु को ब्रह्मा जान तू।।<br />गुरु ब्रह्म है परब्रह्म हैं, यह सोच समझ के मान तू।।<br />कर गुरु की संगत रात दिन, नर जनम अपना सुधार ले।।<br />दे फेक माया बोझ सिरसे, यम का सीस न भार ले।।<br />सीस दे तन मन को दे, गुरु भक्ति रतन अमोल ले।।<br />राधास्वामी भेद बताया तुम को, हिये तराजू तोल ले।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
स्तुति नाम दान प्रदान कीजे, गुरु दीन दयाल।।<br />यरन का नित ध्यान सुमिरन, चित न व्यापे काल।।<br />सर्व समरथ सर्व अंग संग, सर्व जगत अधार।।<br />शुद्ध मन से पद कमल को, करू निस दिन प्यार।।<br />सिंधु भव अति अगम दुस्तर, सूझे बार न पार।।<br />विकल मन रहे सोच छिन छिन, कैसे जाऊँ किनार।।<br />दया कीजे मेहर कीजे, लीजे चरन लगाय।।<br />भक्ति दीजे तार लीजे, कीजे मेरी सहाय।।<br />शब्द में रत रहूँ पल पल, सुरत पावे चैन।।<br />राधास्वामी दया सागर, भजू मैं दिन रैन।।<br />पांचवी धुन Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
धोबिया प्रगटा जग में सजनी, लीजो चूनर धुलाय।।<br />जनम जनम की मैली चुनरिया, देखत जिया घबराय।।<br />धोबिया काम क्रोध कीचड़ लपटानी, दुरगंध बास बसाय।।<br />धोबिया धोबिया आया चतुर सियाना, अवघट घाट सजाय।।<br />धोबिया कर्म की भट्टी तप की अग्नी, ज्ञान का साबुन लाये।।<br />धोबिया सतसंग शिला पे मल मल धोबे, चूनर मैल भराये।।<br />धोबिया फटे न बेगड़े सूत न बिखरे, सहज ही साफ कराय।।<br />धोबिया राधास्वामी धोबिया न्यारा, शब्द का रंग दिलाय।।<br />धोबिया Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
आई वर्षा की ऋतु सजनी, करले मचल मचल स्नान।।<br />टेका। गगन बूद की झड़ियां लगीं, रिमझिम रिमझिम आन।।<br />आई चमके बिजली गरजे अकासा, छाई घटा महान।।<br />आई बिन जल निर्मल बदरा बरसे, परखे साधु सुजान।।<br />आई नहीं मीठा नहीं खारा पानी, अमृत रस की खान।।<br />आई। सुरत शब्द की वर्षा न्यारी, घट परगट दरसान।।<br />आई न्हाय धोय तन मैल छुड़ाले, करले शान्त जिव प्रान।।<br />आई राधास्वामी गावे हित से, राग मल्हार की तान।।आई Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मैं हूँ गुरु का भोला बालक, निस दिन खेलू प्रेम को खेल।।<br />टेक। बायें हाथ परतीत की गोली, दायें प्रीति गुलेल।।<br />धांय धांय मद मोह को मारू, काल का नहीं दबेल।।<br />मैं हूँ माया की रनभूमि पैठि कर, रन से करू कुलेल।।<br />बांका राजपूत बन नाचू, बैरी दल को ठेल।।<br />मैं हूँ राधास्वामी सतगुरु पाया, सीस चरन में मेल।।<br />मेरा काज हुआ अब पूरा, जग दुख आपत झेल।।मैं हूँ Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मैं तो चला गुरु के पन्थ, प्रेम परतीत से धरकर पांव।।<br />टेका। परवत कठिन विकट मैदाना, नहीं कहीं शरन न छांव।।<br />घाटी अटपट टेढ़ा मारग, केहि बिधि मारग जांच।।<br />मैं तो काम सिंह को बन में मारा, दियो न क्रोध को ठाँव।।<br />भक्ति युक्ति को शस्त्र निराला, महिमा केसे गांव।।<br />मैं तोप्रेम दात सतगुरु ने बख्शा, निज बल का निज दाँव।।<br />दुर्गम दास ने घाटी तोड़ी, ले ले राधास्वामी नाँव।।<br />मैं तो Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मैं हूँ भोला भाजा बालक, गुरु की गोद रहूँ दिन रात।।<br />चिंता जग की मुझे न व्या, हरष हुरष हरषात।।<br />बोझ उतारा काल का सिरसे, मन्द मन्द मुस्कात।।<br />मैं हूँ। बाहर भीतर लख गुरु मूरत, चित्त में रूप बसात।।<br />गुरु गम निरख परख कर हरख, दुख मन में नहीं आत।।<br />मैं हूँ। गुरु मेरे भाई सगे सगाई, गुरु मेरे पितु मात।।<br />गुरु सम्बन्धी मीत पियरे, गुरु का सिर पर हाथ।।<br />यक रस,जीवन समय बिताऊ, क्या जाड़ा बरसात।।<br />गुरु की शरन मिली अति कृपा, गुरु ही जात और पाँत।।<br />मैं हूँ राधास्वामी गुरु ने अंग लगाया, दिया प्रेम की दात।।<br />अब तो सुफल भई नर देही, काल करे नहिं घात।।<br />मैं हैं। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
आयो देखन जग को मेला, धरे गुरु चरनन में परतीत।।<br />रमा उमा गायत्री सारद, नाचे गा गा गीत।।<br />काल चक्र का पड़ा हिंडोला, दृश्य महा रमनीत।।<br />आया पुरुष प्रकृति ने सभा रचाई, खेलें हार और जीत।।<br />करम हाथ से पाँसे डारे, अनूकूल, विपरीत।।<br />आया। सुरत गोट चौरासी घर में, दौड़ दौड़ भय भीत।।<br />कभी पक्की कभी कच्ची बन बन, पिटें खेल की रीत।।<br />आया गुरु के संग मिल नाता जोड़ा, खा खा भक्ति का सीत।।<br />मार धाड़ से बचकर निकला, होगया सहज अतीत।।<br />आया। सहज सहज में बन्धन काटे, सीख शब्द की रीत।।<br />। राधास्वामी दया से काज बनाया, दे चरनन में चीत।।आया Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
शम दम साधन करले प्यारी, अवसर अच्छा पाया आज॥टेक॥<br />चित को रोक रोक मन इन्द्री, सहज प्रेम दल साजे।।<br />भक्ति युक्ति आनन्द विलासा, अन्तर जुड़े समाज।।<br />शम दम सुरत शब्द का साधन सीधा, कर मन मुकुर को माँज।।<br />ऊँचे चढ़ निज रूप परखले, द्वन्द पसार से भाज।।<br />शम दम सहस कमलदल त्रिकुटी आजा, सुन में रारंग गाज।।<br />भंवर सोहंगम बजाले बंसी, सत पद को ले राज।।<br />शम दम राधास्वामी भेद बतावे, सन्तों के महाराज।।<br />चरन कमल की छाँह में आजा, करले अपना काज।।<br />शम दम Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
आया तन की अयोध्या नगरी, करले तू अब अपना काज।।<br />दशरथ दस इन्द्री का कुल है, इन्द्री विषय तज भाज।<br />बन में जप तप योग का संयम, प्रेम का जोड़ समाज।।<br />सत तम रज वानर रिंछ निश्चर, मंगल दल नित साज।।<br />लंका गढ़ माया विस्तारा, आग लगा दे आज।।<br />आया सीता सती सत्य की वृती, लेकर अवध का राज।।<br />राधास्वामी भेद बताउँ, सन्तों के सिरताज।।<br />आया Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
उत्तम पुरुष वही है जग में, चले जो प्रेम प्रीत की राह।।<br />आसा तृष्णा मोह माया तज, चित न उठावे चाह।।<br />काम क्रोध मद दूर निकाले, चिंता भव की दाह।।<br />उत्तम सुरत शब्द का साधन सीखे, मन में दूध न डाह।।<br />घट में अन्तर विरती जमावे, भक्ति का परन निबाह।।<br />उत्तम राधास्वामी राधास्वामी मुख से भाखे, अपना भाग सराह।<br />लगन लगे दुख आपत नासे, ले गुरु चरन पनाह।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मनसा होगी तेरी पूरी, मन से करले गुरु का ध्यान।।<br />टेका। मूल नाम गुरु नाम हैं, मूल रूप गुरु रूप।।<br />मूल भजन गुरु शब्द् का, गुरु निवनि के भूप।।<br />गुरु की प्रीत हिये में धार, मिलेगा तब सच्चा गुरुज्ञान।।<br />मनसा तीरथ में है पत्थर पानी, व्रत में कठिन कलेश।।<br />बाद विवाद से मन हो चंचल, तत्व गुरु उपदेश।।<br />करे जो गुरु की संगत मानीं, वह फिर पड़े न भव की खान।।<br />मनसा गुरु विष्णु गुरु शिव की मूरत, गुरुको ब्रह्मा जान।।<br />गुरु ब्रह्म गुरु परब्रह्म है, अपनी बुद्धि पिछन।।<br />गुरु की भक्ति सब का सार है, और सब भरम अज्ञान।।<br />मनसा भटक भटक कर भटका जग में, भट का बारम्बार।।<br />जाके मन में अटक समाना, जाय न झव के पार।।<br />तू सोच समझ चित धार, बात यह सांची मन से मान।।मनसा<br />राधास्वामी सतगुरु पूरे, धरा सन्त अवतार।।<br />सुरत शब्द मत योग बताया, सार सार का सार।।<br />बिन गुरु भक्ति ज्ञान नहीं पावे, सब संतन ने किया बखान।।मनसा Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
सब आये आप ही आप हाथ में, पकड़ लिया जब मूल।।<br />पात पात को सींचते, पेड़ को दिया सुखाय।।<br />जो कोई सींचे मूल को, आप पेड़ हरियाय।।<br />ले मूल सीख यह मन्त्र, न यह उपदेश गुरु को भूल।।<br />पात पात का निरखना, अज्ञानी व्यवहार।।<br />ज्ञानी परखे मूल को, फल पावे तत सार।।<br />सोच यह मन में अपने जल्दी, मिटे द्वन्द का सूल।।<br />गुरु के नाम को सुमिरकर, नाम और विसराय।।<br />गुरु रूप का ध्यान कर, मोह भरम नस जाय।।<br />भजन कर शब्द योग चितलाय, सहे नहीं फिर यम का त्रिसूल।।<br />एकहि साधे सब सधे, सब साधे सब जाय।।<br />एक से सब कुछ होत है, एक से प्रेम लगाय।।<br />ले पहर भक्ति का चीर, फेंककर सब माया के भूल।।<br />सब राधास्वामी नाम ले, राधास्वामी गाय।।<br />राधास्वामी सुमिर मन, हिये गुरु रूप बसाय।।<br />लगा घट बाग में आम का पेड़, न बो तू कीकर और बबल।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
चिंता चित से तज दे सारी, सतगुरु करेंगे तेरी सहाय।।<br />सुमिरन भजन ध्यान चित देना, जग में सुयश कीरती लेना।।<br />भक्ति महातम प्रभाव को चीन्हा, सुख आनन्द घट पाय चिंता<br />क्यों दुख पाता क्यों घबराता, सतगुरु तेरे हैं पितु माता।।<br />जो कोई चरन शरन में जाता, उसे वह लेंगे बचाय।।<br />चिंता राधास्वामी साँच हैं रखवारे, रह तू उनके चरन सहारे।।<br />सुन यह सांची बात को प्यारे, अपना मन समझाय।।<br />चिंता Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मन मतंग बलवान है तेरा, जुगती जतन से उसको जीत।।<br />मन चंचल है मन है भोगी, मन ही बना है रोगी सोगी।।<br />अब इस मन को बनाले जोगी, धार ले सुरत शब्द की रीत।।<br />मन जो चंचल है वही है निश्चल, मेंटदे उसकी अब तू हलचल।।<br />संशोधन कर पंथ में चल चल, सीखले भक्ति प्रेम प्रतीत<br />मन मन की निंदा कभी न करना, सरपर कष्ट का भार न धरना।।<br />कमलपत्र सम भवनिधि तरना, गुरु के नाम का गाना गीत।।<br />मन सतसंगत जब आया प्रानी, अब नहीं उसकी होगी हानी।।<br />नित सुन चित से गुरु की बानी, खाकर जिये प्रसादी सीत।।<br />मन राधास्वामी गुरु ने बिधि बताई, इस विधि से कर अपनी भलाई।।<br />अब तो तेरी सहज बन आई, कर उनके चरण में प्रीत।।मन Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
सब हैं जाने वाले जग में, रहने वाला कोई नहीं।।<br />रामचन्द्र अवधेश भुवाला, दीनानाथ दीन प्रतिपाला।।<br />गये त्यागकर धर्म रटाला, रमने वाला कोई नहीं।।<br />सब रावण गया बुद्धि बल शीला, साहस उद्यम में फुरतीला।।<br />छैल छबीला रंग रंगीला, थमने वाला कोई नहीं।।<br />सब सोलह कला कुण औतारा, जिनकी गति को चार न पारा।।<br />गये सहित कुल और परिवारा, रुकने वाला कोई नहीं।।<br />सब परसराम क्रोधी अभिमानी, तेजस्वी बल बुद्धि की खानी।।<br />ऐसे गये न नाम निशानी, टिकने वाला कोई नहीं।।<br />सब मच्छ कच्छ बाराह पसारा, मिट गये जाने सब संसारा।।<br />गये छोड़ माया विस्तारा, बसने वाला कोई नहीं।।<br />सब बावन बलि सहस्राबाहू, नर भूषण नरेश नर नाहू।।<br />सहसह गये ताप त्रय दाहू, बचने वाला कोई नहीं।।<br />सब विश्वामित्र अगस्ते वशिठा, गौतम न्याय शास्त्र का सृष्टा।।<br />कपिल तत्व के दृष्टि का दृष्टा, गुनने वाला कोई नहीं।।<br />सब दुरयोधन दिल्ली का राजा, जिसने भारत दल को साजा।<br />चला त्यागकर सकल समाजा, सुनने वाला कोई नहीं।।<br />सब राधास्वामी संत शिरोमणि आये, दे चितावनी जीव चिताये।।<br />सुरत शब्द मत पन्थ चलाये, चलने वाला कोई नहीं।।सब Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
जब तू हुआ गुरु का सेवक, गुरु को हरदम तेरा ध्यान।।<br />जो कोई आया शरन गुरु के गुरु उसके रखवारे।।<br />उसको करना धरना क्या है, रहे गुरु के सहारे।।<br />सतगुरु दाता आप करेंगे उसका, सोच समझ कल्यान।।जब तू<br />प्रेम प्रीति परतीत सहज है, क्या जाने संसारी।।<br />यह तो जाने कोई गुरुमुख, गुरु को आज्ञाकारी।।<br />सतगुरु बख्शेगे निज किरपा से, उसे भक्ति युक्ति का दान।।जब तू<br />जो गुरु के हैं गुरु उनके हैं, गुरु को दास पियारा।।<br />गुरु सेवक के आंख के तारे, सेबक गुरु का दुलारा।।<br />कैसे होगा कभी जगत में, गुरु के सेवक को कुछ हाने।।<br />जब तू दास दुखी तो गुरु दुखी है, वह सुखिया गुरु सुखिया।।<br />दास की चिंता गुरु को रहती, वह सब में है मुखिया।।<br />सेवक बनेगा एक दिन भक्त शिरोमणि,ज्ञानी चतुर सुजान।।<br />जब तू यह कहता हूँ सच्ची बानी, गुरु को प्यारा दास।।<br />ऋद्धि सिद्धि नौनिधि गुरु दंगे, मुक्ति न छोड़े पास।।<br />राधास्वामी सिंधु रूप, और सेवक बुन्द समान।।जब तू Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मारग चलो मुसाफिर सोच समझकर, बैठे होय अकाज।।<br />जो चलते हैं गिरते पड़ते, पहुँचेंगे निज धाम।।<br />जो बैठे हैं सुस्त अपाहिज, सो समझो बेकाम।।<br />उनसे कुल सृष्टि करती है, सदा शरम और लाज।।<br />मारग लड़का गिरा उठा फिर संभला, संभल भया बलवान।।<br />अब तो आई देह में शक्ति, सहज में हुआ जवान।।<br />तू भी आलस छोड़ किया कर, निसदिन अपने जन्म का काज।।<br />हाथ में हाथ धर क्यों बैठा, पन्थ में आजा भाई।।<br />पंथाई हो सत के मारग चल, ले गुरु की शरनाई॥<br />हो जावेगा निस्संदेह, राजा परजा का सिरताज।।<br />मारग करम सहज है करम कठिन है, समझ समझ की बात।।<br />जो समझे सो काम बनावे, अनसमझा पछतात।।<br />करम करो हित चित से अपना, करम साज दल साज।।<br />कथनी बदनी छोड़ के प्यारे, करनी से लव लाओ।।<br />करनी से रहनी पावेगा, यह है ठीक उपायो।।<br />संदेसा दिया जानकर तुझको, सतगुरु राधास्वामी महाराज।।मारग Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
चरन शरन की बन्दना, नित कोई और न काम।।<br />गुरु बसो चित आये मेरे, बख्श दो निज नाम।।<br />तेरी शरनागत हुआ फिर, किसकी राखू आस।।<br />आसा तो तेरी दया की, जग से रहूँ उदास।।<br />रूप ध्याऊँ नाम गाऊँ, शब्द राता मन।।<br />आठों याम तेरा हीं सुमिरन, भाग मेरा धन।।<br />सीस पर निज कर कमल धर, लिया चरन लगाय।।<br />पतित पापी तर गया, गुरु शरन तेरी आय।।<br />मुक्ति की नहीं चाह मन में, भक्ति प्यारी लागे।।<br />राधास्वामी की दया से, भाग पूरन जाग।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
प्रार्थना नम सद्गुरुम्, सच्चिदानंद रूपम्।।<br />नमो अद्रुतम्, अद्वितीयम् अनूपम्।।<br />नहीं रूप कोई हैं, सब रूप तेरे है।<br />तेरे सब ही परजा हैं, और भूप तेरे।।<br />धरा सन्त अवतार, जग को चिताया है<br />दुख दन को अंग, अपने लगया।।<br />दिया संग सत का, मिला सतु का जीवन हैं।<br />तेरे नाम पर सीस, तन मन है अर्यन।।<br />झुके राधास्वामी, चरन हँसते हँसते।।<br />तुझे कहते हैं सब, नमस्ते नमस्ते।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
छटवी धुन Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
राजों के महाराज, तुम मेरे सतगुरु स्वामी।।<br />टेक। हित अनहित सब के हितकारी, प्रगटे जन के काज<br />तुम मेरे परमारथ के कारन आये, साज के संत समाज तुम।।<br />मेरे दुखियों का मेटो दुख दारुन, रक्लो उनकी लाज तुम।।<br />मेरे ज्ञानी ध्यानी ऋषि मुनि देवा, सबके हो सिरताज तुम।।<br />मेरे राधास्वामी परमदयाला, चरन शरन दो आज तुम मेरे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
सतसंग वचन सुनाइये, मेरे सतगुरु प्यारे।।<br />सतसंग विवेक न आये, सच्चा पंथ लखाइये।।<br />मेरे देखा देखी भेड़ चाल है, सार तत्व समझाइये।।<br />मेरे तीरथ आपके चरण में रहता, मोहि असनान कराइये।।<br />मेरे गुरु के रूप में साहब बसता, अपना दरस दिखाइये।।<br />मेरे मैं भुजंग तुम चंदन के तुल, अपने अंग लगाइये।।<br />मेरे कोदि ग्रन्थ पढ़ पढ़ क्यों मरना, निज उपदेश चेताइये।।<br />मेरे मैं कमुदिन तुम चन्द्र समाना, अमृत धार चुबाइये।।<br />मेरे तुम नौका मैं लोह कठिन हूँ, भवनिधि सहज तराइये।।<br />मेरे राधास्वामी अपनी दया से, भरम विकार नसाइये।।मेरे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
अमृतधार बहाइये, सतगुरु जग तारन।।<br />टेक। हम सब काल कर्म के मारे, दया से अब तो जिलाइये।।<br />कर्म ने ज्ञान न भक्ति न सेवा, कोई उपाय बताइये।।<br />सत काठ की नाव में लोहा भारी, कैसे हो उसको तिराइये।।<br />सत चरण शरण की प्यास है भड़की, अमृत बूद पिलाइये।।<br />सत तृष्णा अग्नी दहे शरीरा, दर्शन देके बुझाइये।।<br />सत नाम दान दे अपना कीजे, अब कुछ देर न लाइये।।<br />सत मैं हूँ पतित तुम पतित उधारने, हाथ पकड़ के उठाये।।<br />सत त्राह त्राह शरणागत आया, निज पद छांह दिलाइये।।<br />सत राधास्वामी सतगुरु यूरे, सत की राह लगाइये।।सत Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
चरन ओट सहवास हो, सतगुरु करतारा।।<br />टेका। मैं निरास नहीं कोई सहाई, आपकी मेहर की आस हो।।<br />सतगुरु मन के अटपट उमर गंवाई, अब तो कुछ अवकास हो।।<br />सतगुरु घट से तिमिर अविद्या भागे, ज्ञान सूर परकास हो।।<br />सतगरु श्रद्धा प्रेम भक्ति चित बाई, दुरमति कुमति का नास हो।।<br />सतगुरु राधास्वामी मौज दिखाओ न्यारी, आनन्द हर्ष हुलास हो।।सतगुरु Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
आया गुरु दरबार मैं, मेरे सतगुरु साई।।<br />टेका। बल पौरष से हीन भया हूँ, बुद्ध का लाचार मैं।।<br />मेरे ज्ञान भक्ति नहीं कुछ बन आवे, कर्म का निपट गॅवार मैं।।<br />मेरे परमारथ स्वारथ दोऊ खोये, भर्म रहा संसार मैं।।<br />मेरे केसी करू उपाय न सूझे, दान धर्म व्यवहार मैं।।<br />मेरे कायर सम सबको तुज डारा, कुल कुटुम्ब परिवार मैं।।<br />मेरे घर नहीं चेन न बन में शान्ति, घुमा बस्ती उजार मैं।।<br />मेरे राधास्वामी धाम की ओर दृष्टि गई, आप पड़ा गुरु द्वार मैं।।मेरे Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
अपना दो निज ज्ञान, तुम गुरु अंतर्यामी।।<br />टेका। जड़ चेतन चेतन जड़ ग्रन्थी, या इनसे बिलगान तुम।।<br />गुरु हिरण्यगर्भ के अव्यकृत हो, अथवा विराट महान तुम।।<br />गुरु सबल ब्रह्म के शुद्ध ब्रह्म तुम, कै प्रकृती परधान तुम।।<br />गुरु द्वन्द जगत में प्रगट हुये हो, क्या सृष्टी की जान तुम।।<br />गुरु, गो गोचर नहीं मन के विषय नहीं,शब्द अनुमान प्रधान तुम।।<br />गुरु सत्र में व्यापक सब से न्यारे, क्या कूटस्थ निशान तुम।।<br />गुरु, राधास्वामी कुछ भेद बतादों, ज्ञान विज्ञान सुजान तुम।।गुरु Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
साध जनम का काज तू, प्यारी सुरत सहेली।।<br />आज का काम जो काल में छोड़ा, अपना करे अकाज तू।।<br />सुरत गया समय फिर हाथ न आवे, अवसर गहले आज तू।।<br />सुरत घट में घट घट ऊपर चढ़जा, ले त्रिकुटी का राज तू।।<br />सुरत छोड़ कुसंगत कर सतसंगत, जो सतगुरु के समाज तू।।<br />सुरत प्रम प्रीत परतीत सहज है, मन मनसा को भाँज तू।।सुरत<br />सत का नूर दृटि में आवे, हिये की आँख को आंज तू।।<br />सुरत राधास्वामी चरण ओट दृढ़ करले,भक्त साज दल साज तु।।सुरत Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
सब विधि है अनजान हम, प्रभू सतगुरु स्वामी॥टेक॥<br />समझ विवेक बुद्धि नहीं पाई, अपना रूप न जान हम।।<br />प्रभू तुम तो मात पिता सम्बन्धी, बाल अकार समान हम।।<br />प्रभू चंचल मूढ़ महा अज्ञानी, ग्रसित मोह मद मान हम<br />प्रभू अब तो आन पड़े शरणागत, बने विवेकी सुजान हम।।<br />प्रभू राधास्वामी प्रेम शक्ति दो, पायें भक्ति का दान हम।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मानुष जनम सुधार तू, मेरी सुरत सुहागिन।।<br />पिया की शरण में जल्दी आजा, चित धर प्रेम पियार तू<br />मेरी माँग भरा भक्ति सेंदूर से, माँग परम सिंगार तू मेरी<br />क्षमा की चूनर दया की साड़ी, पहर के चल दरबार तू<br />मेरी पिया के महल का सुख आनन्द ले, डाल जगत<br />सिर छार तू मेरी राधास्वामी साँचे प्रीतम, चरन कमल हिये धार तू।।मेरी Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
भक्ति साज दल साजरी, मेरी सुरत पियारी।।<br />क्यों तू सोई माह नींद में, काल सीस पर गाजरी मेरी।।<br />सुरत जाग जाग उठ जाग अचेती, सोये होय अकाजी मेरी।।<br />सुरत डाकू चोर लगे तेरे पीछे, उनसे बचकर भाजरी मेरी।।<br />सुरत सतगुरु आये तोहि चितावन, चेत के करले काजरी मेरी।।<br />सुरत राधास्वामी गुरु की ले शरनाई, अवसर पायो आजरी मेरी।।सुरत Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
कर चित से सतसंग, अब मेरी सुरत सुभागी॥टेक॥<br />मोह भरम के बंधन तजदे, ज्यों केंचुली भुजंग अब मेरी<br />जग के रंग से भई कुरंगी, धार गुरु का रंग अब।।<br />मेरी गहरा ध्यान जमे घट भीतर कीट से होजा भृग अब।।<br />मेरी अन्तर जोत जगे तेरे जगमग, जल ज्यों दीप पतंग अब।।<br />मेरी सुन सुन शब्द अनाहद की धुन, होजा बन की कुरंग अब<br />मेरी मन समुद्र में उमड़े सजनी, प्रीत प्रतीत तरंग अब।।<br />मेरी मान मनी के भूल निशे को, पी पी प्रेम की भंग अब<br />मेरी माया काल के रन में पग दे, कर दोनों से जंग अब मेरी<br />राधास्वामी दया से काज बनेगा, हो न कभी दिल तंग अब मेरी Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
अन मत चित नहीं ठानरी, गुरु मत अनुरागी।।<br />टेका। नारी पुत्र के बंध बंधाना, हृदय सतगुरु ज्ञान री।।<br />गुरु मत कहाँ से आया क्यों तू आया, करले कुछ अनुमान री।।<br />गुरु मत सुमिरन भजन में कौन बसे घट, किस का अन्तर ध्यान री।।<br />गुरु मत बात बनाना छोड़ दे प्यारे, तज आपा अभिमान री।।<br />गुरु मत लगन लगी नहीं राधास्वामी से,समझ तू चतुर सुजानरी।।गुरु मत Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
मन की दुरगति टार री, मेरी सुरत अचेती।।<br />करता बन कर काम करे नित, लेती दुख सुख भार री मेरी।।<br />सुरत स्वारथ बस परलोक नसाया, नहीं परमारथ प्यार री मेरी।।<br />सुरत चोर राख मन धन लुटवावे, करे न गुरु रखवार री मेरी।।सुरत<br />भजन भाव में रहे अलसानी, टारे जान बेगार री मेरी।।सुरत।।<br />राधास्वामी गुरु का दरस ततकाला, घट के नैन उघार री मेरी।।सुरत Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
कहना मेरा मानरी, मेरी सुरत अचेती।।<br />निज स्वरूप जब से तू भूली, अपना किया अयमान री मेरी।।<br />सुरत सत्त धाम की राजकुमारी, क्यों पड़ी योनि की खान री मेरी।।<br />सुरत माया ने भर्माया तुझको, अटकी मया मद मान री मेरी।।<br />सुरत शुभ अवसर मानुष तन पाया, अब तो ले गुरु ज्ञान री मेरी।।<br />सुरत राधास्वामी सतगुरु दाता, देंगे भक्ति का दान री मेरी।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
सुरत अचेतरी जाग री, मेरी सुरत अचेती।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
घट में दीवा बालरी, आज आई दिवाली।।<br />सुरत की सूत की पूरे बाती, प्रेम तेल हिये डालरी आज।।<br />आई शब्द अग्नी की जोत जलावे, वायु विषय से संभालरी आज।।आई<br />जगमग जोत प्रकाशे च दिस, तिमिर अविद्या टाल री आज।।<br />आई राधास्वामी घट की दिवाली मनाचे,और सकल जंजाल री आज।।आई Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
गुरु धुर धाम को भाग री, मेरी प्यारी सुरतिया॥टेक॥<br />जनम जनम भव निद्रा सोई, समझ चेत उठ जाग री मेरी।।<br />प्यारी गुरु बल मोह की तोड़दे रसरी, जैसे कांचा ताग री मेरी।।<br />शब्द शिला पर धो मेरी सजनी, कलि मल के सब दाग री मेरी।<br />सुमिरन मंत्र से जीतले अबकी, कोल करम के नाग री मेरी।।<br />राधास्वामी चरन धार सिर ऊपर,भक्ति प्रेम बर मांग री मेरी।। Coming soon… Coming soon… Coming soon… Coming soon…
Updated: November 30, 2025 — 10:38 am

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