यथार्थ संदेश प्यारे जोगेन्द्र, तुम्हारा पत्र मिला । तुमने लिखा कि मेरे और इटारसी निवासी सत्संगियों के सुधार के लिये कुछ लिखा जाय । सोचता हूँ क्या कहूँ, और क्या न कहूँ मेरे अज़ीज ।। अपने जीवन का जो अनुभव, वह ही दे सकता अजीज ।। मनुष्य के अस्तित्व को जब होश आता है, संसार […]







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