शिवाय नमः शिव वर्ष १] अप्रैल सन् १९५५ ई० [ तरंग २ प्रार्थना सतगुरु ! एक तुम्हारी अस, दाता एक तुम्हारी आस । भूल भरम पड़ समझी अलग हूँ तुम तो मेरे पास । रोम २ व्यापक में तन में, तुम साँसों की साँस ।।सतगुरु…. तुम नहिं गगन, पताले न पृथ्वी, तुम न मेरु कलाश […]







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