Category: Shiva Shabdasagar

Shiva Shabdasagar Part I- 201 TO 400

201. ज्ञान का जब धन मिला है, ज्ञान के भंडार से। भय हो क्यों अज्ञान से, और उसके कारागार से ॥॥ सुरत में है शब्द और है, शब्द उसका आसरा ।। यह बसेगी अब वहाँ, निज शब्द के आधार से ॥॥ चढ़ गया पहिले सहस दल के, कंवल में ध्यान कर। फिर हुआ सम्बन्ध गहरा, […]

Shiva Shabdasagar Part I- 1 TO 200

1.मंगलम् मंगलम् गुरुदेव मूरति, मंगलम् पद पंकजम् । मंगलम् अव्यक्त अनुपम, मंगलम् भव गंजनम् ॥ मंगलम् धुरपद निवासी, मंगलम् सत् आसनम् । मंगलम् निर्वाण सद्गति, मंगलम् जन रन्जनम् ॥ मंगलम् ज्ञान स्वरूपम्, मंगलम् आनन्द रूप । मंगलम् चैतन्य सदनम्, मंगलम् सत सत्य भूप ।। मंगलम् योगीन्द्र माया, तीत मंगल दायकम् । मंगलम् संसार सारम्, अद्भुतम् […]

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