401.नहीं तेरा है देश यह, मेरी प्यारी सजनी।।सत पद तेरा निज अस्थाना, आन पड़ी परदेश यह मेरी प्यारीकठिन कमे के काट दे बन्धन, धार सहज उपदेश यह मेरी।।इन्द्री मन नहीं रूप हैं तेरे, सब माया के भेस यह मेरी।।घट में शब्द धार जो प्रगटी, सोई सत्त संदेश यह मेरी।।राधास्वामी सहजयोग बिधि गाई,नहीं कठिन लवलेश यह […]
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Shiva Shabdasagar Part I- 201 TO 400
201. ज्ञान का जब धन मिला है, ज्ञान के भंडार से। भय हो क्यों अज्ञान से, और उसके कारागार से ॥॥ सुरत में है शब्द और है, शब्द उसका आसरा ।। यह बसेगी अब वहाँ, निज शब्द के आधार से ॥॥ चढ़ गया पहिले सहस दल के, कंवल में ध्यान कर। फिर हुआ सम्बन्ध गहरा, […]
Drustant Sandesh
सम्पादकीय प्रार्थना भगवन् ! | मैं तुम से क्या माँगू ? तुम्हारे पास है क्या? तुम सब कुछ दे दिलाकर सब प्रकार से आजाद (मुक्त) होकर विचित्र रूप में नज़र आरहे हो । लोग कहते हैं तुम सब कुछ हो और कुछ भी नहीं । मन की तुम तक पहुंच नहीं । वाणी और बुद्धि […]
ANMOL VICHAR
अनमोल विचार प्रथम तरङ्ग प्रार्थना | मैं तुम से क्या माँगू ! तुम्हारे पास है क्या ! तुम सब दे दिलाकर खाली हाथ दिखलाई देते हो । कहते हैं तुम सब कुछ हो और कुछ भी नहीं । तुम मन और बुद्धि की पहुँच से बहुत दूर हो । फिर मैं माँगू भी तो कैसे […]







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